फैज अहमद फैज
मत रो बच्चे
रो रो के अभी
तेरी अम्मी की ऑख लगी है
मत रो बच्चे
कुछ ही पहले
तेरे अब्बा ने
अपनें गम से रूख्सत ली है
मत रो बच्चे
तेरी बाजी का
डोला पराए देस गया है
मत रो बच्चे
तेरे ऑगन में
मुर्दा सूरज नहला के गए है
मत रो बच्चे
अम्मी ,अब्बा बाजी ,भाई
चॉद और सूरज
रोएगा तो और भी तुझ को रूलवाएंगें तू मुस्काएगा तो शायद
सारे इक दिन भेस बदल कर
तुझे से खेलने लौट आएंगा