मैगलूर पब में लडकियो की पिटाई कें बाद सुिर्खयों में आए श्री राम सेना प्रमुख प्रमोद मुथलिक ने जमानत पर बाहर आने के बाद एक बार फिर नया विवाद को जन्म दे दिया है मुथलिक का कहना है कि नूडल स्ट्रेप और तंग जिन्स नही पहनने की चेतावनी दी है
सवाल नैतिकता की रक्षा के नाम पर की जा रही आक्रमक किस्म कि हरकतों क औचित्य को लेकर है , श्रीराम सेना जैसे संगठन का नाम कोई नही जानता था परंन्तु मदिराल्य में घुस कर लडकियों की पिटाई कर वह मीडिया के माध्यम से चर्चा में आ गये , मंगलूर तथा कर्नाटक के अन्य ‘ाहरो में पब कोई आज नही खुले नही आज कोई लडकियां जिंस और नूडल पहनती है बल्कि काफी समय से चल रहे है लेकिन अब येदुयुरपा कहते है कि व ेपब कल्चर के खिलाफ है , क्या वे अब तक श्रीराम सेना की हिंसक पहल का इंतजार कर रहे थे? ऐसी ही ढील के चलते इस तरह के संगठन कुकुरमुते की तरह पनपते है जो मॉरल पोलिसिंग या खुदाई खिदमतगार बनकर अपना उल्लू सीधा करते है , वस्तुत यह स्वीकार करना होगा कि आधुनिकता की अंधी दौड में संस्कृति ,परंपरा और चरित्र सभी पीछे छूट गए है । खुद का मार्डन या समय के साथ दिखने के लिए नई पीढी वर्जनाओं को तोडने में कोई अपराध महसूस नही करते ,लडकियों का पुरूश मित्रों के साथ ‘ाराब घर में जाकर िड्रक लेना धूम्रपान करना ऐसी बाते है जिनके बारे में छोटे ‘ाहरों या कस्बाई संस्कृति में पले -बढे लोग सोच भी नही सकते जो दूशण अंग्रेजो के ‘ाासन में भी नही पनपे थे, वह आज बडे ‘ाहरो मे नजर आते है कुछ दशक पीछे जाए तो समाजिक ढॉचा काफी भिन्न था । लोग पाप -पुण्य का विचार करते थे और उनके मन के किसी कोने में ईश्वरीय दंड का भय बना रहता था । इसकेे अलावा समाजिक बुजुर्गो के रहते मर्यादा का उल्लघन करना हंसी -खेल नही था ऐसा करने पर सामाजिक बहिश्कार की नौबत आ सकती थी , कानून का भय भी अपना काम करता था धीरे -धीरे ये सारे भय काफूर हो गये , पब और डिस्कोथेक ख्ुाल गए । ऐसे माहौल में पली - बढी पीढी के लिए समय का चक्र पीछे नही घुमाया जा सकता संस्कारेा को पीछे छोडकर बढी सम्पन्नता अपने साथ धनशक्ति का भौडा प्रदशZन लाती है ऐसी बातों पर राजनीति की रोटी न सेकते हुये समाज प्रबोधन के माध्यम से समस्या का हल निकालना ही हितकर माना जाना चाहिए
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