भीषण गर्मी में वाहन चालक व यात्री हो रहे है परेशान,हरियाली होने से सड़क हादसे होते है कम 
 मंडे स्टोरी
बठिंडा,20 मार्च (आजाद) मई माह में पारा 40 डिग्री के पार जाने से आसमान से आग बरसता शुरू हो गया है। इस चिलमीलाती धूप में घर से बाहर निकलकर सड़क पर आते गर्मी दोगुन्नी महसूस होने लगती है। लम्बी दूरी के यात्री परेशान हो रहे है,गर्मी से इतना बुरा हाल है कि कुछ यात्री तो धूप के कारण बीमार पड़ गए है। गर्मी का दंश सबसे ज्यादा वाहन चालको को झेलनी पड़ रही है क्योंकि पूरा दिन सड़क  पर ही गुजरता है। इस करण वाहन चालको के स्वास्थ्य पर गर्मी का प्रतिकू ल असर दिखाई दे रहा  है और न चाहते हुए वह बीमार हो रहे है। गर्मी के कारण परेशान होकर वाहन चालक दुर्घटना को अंजाम दे रहे है क्योंकि गर्मी से मानसिक रूप से परेशान हो जाते है और जिससें गाड़ी का संतुलन बिगड़ जाने से दुर्घटना हो जाती है। 
इस मौसम की नियती मान कर लोग व वाहन चालक गर्मी के दंश को झेलने को मजबूर है लेकिन पर्यावरण विदों का कहना है कि सड़क पर गर्मी समस्या का मूल कारण नहीं है। बल्कि मूल करणों पर किसी का ध्यान न देने से यह समस्या उत्पन्न होती है। जब सड़क का निर्माण किया जाता है तब सड़क निर्माण करने वाला ठेकेदार सड़क निर्माण के  राष्ट्रीय मानक का ध्यान नहीं रखता है। सिर्फ सड़क बनाकर चला जाता है। जबकि सड़क बनाने के साथ-साथ उसकों पेड़ भी लगाना नियम में शामिल है लेकिन ज्यादातर सड़क निर्माण कंपनिया नियम की अनदेखी करती है इसी वजह से समय रहते हुए सड़क किनारे पेड़ नहीं लगाया जाता है। जिसके  भुगतभोगी वाहन चालक और आम लोग होते है। अगर सड़क किनारे राष्ट्रीय मानक के हिसाब से पेड़ लगे हुए होते तो काफी हद तक दुर्घटना पर काबू पाया जा सकता है क्योंकि सड़क किनारे व सड़क के बीच में हरियाली होने से वाहन चालक गाड़ी का संतुलन खो देता है और गाड़ी दुर्घटना ग्रस्त हो जाती है। 
-------------
सड़क पर हरियाली का अभाव व दो पहर में सुनसान हुआ (सुनील)
डेवलपमेट का प्रतीक है रोड 
किसी भी शहर में सड़क के महत्च को इसी से आकते है कि अगर शहर में सड़क सही है तो कोई भी मान लेता है की शहर का डेवलपमेट खूब हुआ है। एक तरह से सड़क डेवलपमेंट का प्रतीक बन चुका है इसलिए राजनीतिक पार्टियां भी अपने चुनाव मैनुफेस्टों में सड़क बनाने की बाते को प्रमुखता देते है लेकिन अभी तक डेवलपमेट को प्रतीक के रूप में हरियाली को नही देखने के वजह से भी सड़क के किनारे अथवा सड़क के बीचों बीच में हरियाली नही लगाए जाते है। 
सड़क निर्माण में काट डाले पेड़ 
गांवों में बाग-बगीचे अब कम हो गए हैं। जो पेड़ सड़क किनारे बचे थे,उसे सड़क चौड़ा करने के नाम पर उन्हें भी काट दिया गया हैं लेकिन उनकी जगह नए पेड़ नहीं लगाए गए। सड़क किनारे वन विभाग को पेड़ लगवाने थे लेकिन अफसरों की लापरवाही से सड़कों के किनारे हरियाली कम हो गई है। ऐसे में दिनों दिन गर्मी का असर बढ़ता जा रहा है। गर्मी के दिनों में पक्षियों के लिए छांव और आशियाना छिन गया है। जिला में जब से सड़कों के चौड़ा करने के निर्माण का काम शुरू हुआ जिले से होकर गुजर रहे फोर लेन को चौड़ा करने का काम करीब 2 साल पहले से किया जा रहा है। तब हाईवे किनारे लगे करीब 30 हजार पेड़ों का काट दिया गया। इन पेड़ों को काटने के लिए लोक निर्माण विभाग ने वन विभाग को पैसा भी दिए। वन विभाग ने पेड़ कटवाकर उसे बेच भी लिया। उस पैसों से हाईवे बनने के बाद उसके किनारे पौधे लगाने थे लेकिन वन विभाग ने नहीं लगाए। ऐसे में गाडिय़ों से निकलने वाला धुआं आसपास की बस्ती को प्रदूषित कर रहा है। बङ्क्षठडा जिला मुख्यालय को पटियाला व चंडीगढ से जोडऩे के लिए फोन लेन सड़क बनाई गई। इस दौरान सड़क किनारे लगे करीब 17 लाख पुराने पेड़ों को काटा गया। उसका पैसा भी लोक निर्माण विभाग ने वन विभाग को दिया। सड़क बनने के बाद उसके किनारे पौधे लगाने थे लेकिन अब तक इस रोड किनारे वन विभाग ने एक भी पौधे नहीं लगाए हैं। ऐसे में मई महीने में यह सड़क तपने लगी है सड़क की तपीश जून व जुलाई महीने तक इसी तरह जारी रहने वाला है।  
गौरतलब हो कि बठिंडा,शहर में हरियाली कायम कर पर्यावरण के संरक्षण के लिए जुलाई में सड़क किनारे 4 लाख पौधे लगाए थे। देखरेख व पानी के अभाव में करीब सवा लाख पौधे सूख गए। पर्यावरण संरक्षण के लिए हर वर्ष जिले में चार हजार से अधिक पौधे लगाए जाते हैं। इसमें सरकार का लाखों रुपये भी खर्च होता है, लेकिन जिन व्यक्तियों को पौधे की देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है। वह पौधों की देखरेख सही तरीके से नहीं करते है और न ही पौधे की ङ्क्सचाई के लिए उचित व्यवस्था की जाती है। इसकी वजह से रोपित किए गए पौधों में कई सूख जाते हैं। इससे जिले में हरियाली नहीं कायम हो पा रही है। 
रोड किनारे व बीच में पेड होने के फायदे
सड़क किनारे हरियाली होने से कई फायदे होते है। तात्कालीक फायदा यह है कि लोग वाहन चालक व यात्री धूप व गर्मी से बचते है व जिससे वाहन चालक तनावमुक्त होकर गाड़ी चलाता है। जिससे दुर्घटना होने की संभावना कम हो जाती है। इसी के साथ हरियाली होने से वायु प्रदुषण कम होता है जिससे वाहन चालक के शरीर को हरियाली का प्रतिकुल असर पड़ता है। इतना ही नही इससे ध्वनी प्रदुषण भी कंट्रोल करने में सहायक होता है व वातावरण में नमी बरकरार रखने में सहायक ङ्क्षसद्ध होता है । जिससे प्रदुषित वायु जनित घातक बीमारियों अस्थमा,तनाव,कैंसर,चर्मरोग को कम करने में सहायक होता है। 
बाक्स हेतु
-वाहन चालक व यात्री को धूप व गर्मी कम लगाता है 
- वाहन चालक तनावमूक्त होकर वाहन चलता है 
-वायु प्रदूषण को कंट्रोल करना 
-ध्वनी प्रदूषण पर अंकुश लगाता 
-वातावरण में नमी बरकरा रखता  है 
- तापमान को संतुलित रखता है 
-ध्वनी प्रदुषण को कम करता है ।
क्या कहना है यात्रियों का 
बठिंडा निवासी राम कुमार रामू का कहना है कि कारोबार के सिलसिले में हमेशा चंढीगढ आना जाना होता है लेकिन इस हाइवे पर पेड़ नही होने के कारण ही लोगों धूप व गर्मी ज्यादा लगती है। घंटों तक धूप में रहने से बीमार पर गए गया हुॅ इलाज करवाय और तो कु छ दिन ठीक रहा लेकिन लगातर यात्रा करने से फिर से मेरा तबीयत खराब हो गया है। जिस कारण अब चंढीगड रेल से यात्रा करना पसंद करता हूॅ।
-------------
राम कुमार रामू 
क्या कहना है वाहन चालक का 
वाहन चालक बलजीत सिंह से का कहना है कि पटियाला बठिंडा, रूट पर बस चलाता हॅू। बस चलाने का समय सुबह 10 बजे से लेकर शाम 8 बजे तक रहता है । इस दौरान पूरा दिन मेरा बस चलाते हुए गुजर जाता है। इतनी गर्मी में बस चलाने बहुत परेशानी होती है क्योंकि गर्मी में बस के इंजन जल्दी ही गर्म हो जाते है और उपर से मौसम की गर्मी  ने तो जीना दुश्वार कर दिया है । गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती और शरीर बेजान सा हो जाता है । मैं करीब दस वर्षो से गाड़ी चला रहा हॅू पहले सड़क के किनारे पेड़ हुआ करते थे जो अब काट दिए गए है इससे और परेशानी बढ़ गया है  । 
---------
बलजीत सिंह वाहन चालक