कमल का फुल हमारी भूल
नोटबंदी के मार से अभी आम आदमी संभलने के कोशिश कर रहा था। कारोबारी अपने अपने बिजनेस को पटरी पे लाने लगे हुए थे। मज़दूर आटा दाल बाजार से लाने को निकला ही था कि तभी सरकार ने गुड्स एंड सर्विसज टैक्स (जीएसटी) लागू करने की घोषणा कर दी। इस जीएसटी के जंजाल में लोग इस कदर उलझ चुके है कि जितना निकलना चाहते है,उतना ही फसते जा रहे है। सारे कारोबारी अपना काम छोड़कर जीएसटी को समझने में लग गए।आखिर जीएटी किस तरह से फंशन करता है। मगर किसी के दिमाग में कुछ भी घूस नही रहा है।तीन माह से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी जीएसटी अधिकतर लोगो को समझ में ही नही आया। अब जीएसटी का जीन बोतल से निकलकर बाहर आ गया है। जिससे गरीब को और गरीब और अमीर को और अमीर बना रहा है ।
सारे कारोबार को किया ठप
जीएसटी की वजह से त्योहारों के सीजन में छोटे व्यपारी और दुकानदारो को आर्थिक रूप से नुकसान हो रहा है। लोगों को समान खरीदने बेचने में बहुत ही परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिससे दुकानदारों को काफी आर्थिक नुकसान हो रहा है।जीएसटी एक तरह से व्यपारियों का बिजनेस चैन ही तोड़ दिया है।अधिकतर छोटे दुकानदार के जो ग्राहक होते है वह उधार समान लेते है। महीने दो महीने के बाद उस छोटे दूकानदार को पैसा देते है लेकिन जीएसटी को लागू होने से छोटे दुकानदार अपने ग्राहक को उधार समान देना बंद कर दिया है क्योंकि उस छोटे दुकानदार को भी बडे व्यपारियो से उधार नही मिल रहा है।जब से जीएसटी को लागू किया गया है,तब से ये छोटे कारोबारी कैश में अपना बिजनेस करने लगे है।ऑन कैश समान लाने के वजह से छोटे दुकानदार अपने ग्राहक को भी उधार समान नही देता है। इस वजह से ग्राहक के परचेजींग पावर कम हो गया है। अब वह अधिक जरू रत के ही समान खरीदता है ।
मजदूरो को रोटी मिलना हुआ मुहाल
जीएसटी लागू होने के वजह से काम करने वाले मजदूरों पर भी इसका प्रभाव देखने को मिला है। इसके लागू होने से कोई भी कंस्ट्रशन का काम नही करा रहा। हाउस लोन 4.5 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया है। हाउस लोन में वृद्धि से लोगो ने घर लेने में कमी आई है।वही बिल्डर भी घर नही बना रहे है। जिस वजह दूकान के समानों की बिक्री नही हो रही है। वही दूसरे ओर मजदूरो को काम नही मिलने से त्योहार में खरीदारी भी नही कर पाते है।व्यपारियों में एक तरह से डर का भी माहौल बना हुआ है कि कही उनको टैक्स चोरी में न फस जाये और कमाई से ज्याद नुकसान उठाना पड़े।
6 करोड़ कारोबारी को कम्प्यूटर चलाना नही जानते
प्रवीण खंडेलवाला,अध्यक्ष कनफडरेशन ऑफ ऑल इंडिय़ा ट्रेडर्स के मुताबिक दस करोड़ छोटे दुकानदार और कारोबारी में से 6 करोड़ दुकानदारो को कम्प्यूटर चलाना नही जानते। लेकिन जीएटी सिर्फ कम्प्यूटर जानकार ही भर सकता है। इन छोटे कारोबारी और दुकानदार के साथ साथ गांव के इकोनोमी पुरी तरह से चरमारा गई है।इस असंगठीत क्षेत्र में जीडीपी का 50 प्रतिशत हिस्सा है और 80 प्रतिशत नौकरी इन्ही असंगठित क्षेत्रों से पैदा होते है। जीएसटी की वजह से बड़े कारोबारी को बहुत फायदा हुआ है क्योंकि उनके पास प्रोफेशनल कर्मचारी रखे हुए है।राज्य सरकारों को भी जीएसटी की वजह से नुकसान हुआ है क्योंकि उनको टैक्स के रूप में पैसा नही मिल पा रहा है।पंजाब सरकार अपने क्रमचारियों को तवनख्वाह नही दे पा रही है। जीएसटी से केंद्रिय टैक्स कलेक्शन में राज्य सरकार का हिस्सा तीन माह के बाद मिल पाऐगा।
कमल का फुल हमारी भूल
देश के कारोबारियों के परेशान हो गये है कि सरकार के खिलाफ ही खडें हो गये है। प्रधानमंत्री के गृह राज्य के व्यपारियों ने अपने नये जीएटी के बिल पर लिखवा रखा है कि कमल का फुल हमारी भूल।यह बील सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। गुजरात के ये वह व्यपारी है जो प्रधानमंत्री को 2014 के लोक सभा चुनाव में समर्थन किया था।आज वही व्यपारी जीएसटी के खिलाफ हो चुके है।गुजरात के व्यपारियों का कहना है कि जीएसटी के वजह से हमें ज्यादा समय खराब हो रहा है वही काम करने में भी दिक्कत हो गया है।

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