70 एम एम के परदे पर हीरोइन को देखने के हम इनते आदि हो चुके है कि इसके अलावा किसी लड़की को हीरोइन के छवि में नही देखना चाहते। हालांकि हमारे समाज में परदे से भी अच्छी हीरोइन है। यह रियल हिरोइन परदे के हीरोइन को भी मात दे सकती है। मगर उसे अपना हिरोइन मानने को तैयार नही होते है। वजह बिल्कु ल स्पष्ट है,यह आप को देखकर मुस्कुराती नही है। आप के कुंठित भावनाओं को भड़काती नही है। परदे कि हीरोइन आप जो चाहते है,वही करने को तैयार रहती है। आप ही के लिए गाती रहती है। मुन्नी बदनाम हुई,डार्लिग तेरे लिए और आप खुश होकर कोल्ड ड्रिंक्स खरीद लाते है। कोल्ड ड्रिंक्स के कमाई से मुन्नी के पापा करोड़ो के कारोबार कर लेते है। मगर रियल हीरोइन आप से उल्टे सवाल करती है। आप से अपना अधिकार मांगती है ।
मैने कभी भी परदे के हीरोइन को पसंद नही किया (सिवाए नंदिता दास को छोड़कर) एक वजह यह भी हो सकता है कि इन हीरोइन से अभिनय से ज्यादा अंग प्रदर्शन करवाया जाता है। हालांकि नई हीरोइनों के अभिनय ने परदे पर अपना जौहर दिखाया है । इसी वजह से मेरे दिमाग के इनबॉक्स में हीरोइन के कमरा कब से खाली पड़ा था । यह खालीपन तब पुरा हो गया। जब सोशल मीडिया पर बीएचयू के लड़कियों को फटे हुए सर और टुटे हुए पैर देखा। उसी वक्त मेरे दिमाग के इनबॉक्स का कमरा फुल हो गया। मै ऐसे ही हीरोइन को तलाश रहा था। सोशल मीडिया पर बीएचयू के लड़कियों के वीडियो कई बार देखा। अब बीएचयू के लड़कियां का फैन हो गया हूॅ। ये लड़कियों को हिरोइन के रूप में देखता हूॅ। सभी को बीएचयू के लड़कियों को हौसले को सलाम करना चाहिए ।
मै यह जानते हुए भी कह रहा हूॅ कि तुम्हारे खिलाफ इस समाज के बहुत बड़ा तबका है। कुछ लोगों को यहां तक कहते सुना कि बीएचयू के लड़कियों के साथ कुछ नही हुआ है । यह तो सब मीडिया द्वारा क्रीएट किया गया है। ऐसे गैर जिम्मेदार शब्दों के प्रयोग करने वाले जिम्मेदार व्यक्ति से मेरा एक सवाल है। जरा आप अपने दिल पर हाथ रखकर एक बार सोचिए। अगर आप के बेटी के साथ ऐसा हुआ होता तब भी आप ऐसे ही शब्दो का प्रयोग करते ।
मै जानता हुॅ । अभी आप सता के नशे में चूर है। अभी आपको ना कुछ सुनाई देता है और ना कुछ दिखाई दे रहा है। जिस दिन आपके बेटी के साथ होगा । उस दिन आप ही के शब्दों का प्रयोग करेगा । कहेगा ये तो मीडिया द्वारा क्रियट किया गया है--------।
बीएचयू कि लड़कियां मै जानता हुँ कि तुमलोगों के मांग का दायरा बहुत विशाल है । तुम अंधेरे रातों में अपनी हिस्सेदारी जताना चाहती हो। बीएचयू में ही नही पुरी दुनिया में तुमको रात के अंधेरे में तुम्हारा हक नही है। तुमलोग उस पर अपना मौलिक अधिकार माग रही हो । तुम रात भर अंधेरे को देखना चाहती हो। इतनी बड़ी मांग कि कुछ तो सजा मिलेगा ही ऐसे कै से हो सकता है ।
मैने कभी भी परदे के हीरोइन को पसंद नही किया (सिवाए नंदिता दास को छोड़कर) एक वजह यह भी हो सकता है कि इन हीरोइन से अभिनय से ज्यादा अंग प्रदर्शन करवाया जाता है। हालांकि नई हीरोइनों के अभिनय ने परदे पर अपना जौहर दिखाया है । इसी वजह से मेरे दिमाग के इनबॉक्स में हीरोइन के कमरा कब से खाली पड़ा था । यह खालीपन तब पुरा हो गया। जब सोशल मीडिया पर बीएचयू के लड़कियों को फटे हुए सर और टुटे हुए पैर देखा। उसी वक्त मेरे दिमाग के इनबॉक्स का कमरा फुल हो गया। मै ऐसे ही हीरोइन को तलाश रहा था। सोशल मीडिया पर बीएचयू के लड़कियों के वीडियो कई बार देखा। अब बीएचयू के लड़कियां का फैन हो गया हूॅ। ये लड़कियों को हिरोइन के रूप में देखता हूॅ। सभी को बीएचयू के लड़कियों को हौसले को सलाम करना चाहिए ।
मै यह जानते हुए भी कह रहा हूॅ कि तुम्हारे खिलाफ इस समाज के बहुत बड़ा तबका है। कुछ लोगों को यहां तक कहते सुना कि बीएचयू के लड़कियों के साथ कुछ नही हुआ है । यह तो सब मीडिया द्वारा क्रीएट किया गया है। ऐसे गैर जिम्मेदार शब्दों के प्रयोग करने वाले जिम्मेदार व्यक्ति से मेरा एक सवाल है। जरा आप अपने दिल पर हाथ रखकर एक बार सोचिए। अगर आप के बेटी के साथ ऐसा हुआ होता तब भी आप ऐसे ही शब्दो का प्रयोग करते ।
मै जानता हुॅ । अभी आप सता के नशे में चूर है। अभी आपको ना कुछ सुनाई देता है और ना कुछ दिखाई दे रहा है। जिस दिन आपके बेटी के साथ होगा । उस दिन आप ही के शब्दों का प्रयोग करेगा । कहेगा ये तो मीडिया द्वारा क्रियट किया गया है--------।
बीएचयू कि लड़कियां मै जानता हुँ कि तुमलोगों के मांग का दायरा बहुत विशाल है । तुम अंधेरे रातों में अपनी हिस्सेदारी जताना चाहती हो। बीएचयू में ही नही पुरी दुनिया में तुमको रात के अंधेरे में तुम्हारा हक नही है। तुमलोग उस पर अपना मौलिक अधिकार माग रही हो । तुम रात भर अंधेरे को देखना चाहती हो। इतनी बड़ी मांग कि कुछ तो सजा मिलेगा ही ऐसे कै से हो सकता है ।

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