मेरी छोटी बहन को केंद्रीय विश्वविधालय में पढने का बहुत
शौक था सो उसने बारहवी के परीक्षा देने के बाद से ही केंद्रीय विश्वविधालय में प्रवेश
के लिए तैयारी शुरू कर दी | चूँकि संसद में पारित अधिनियम 2009
के द्वारा हर राज्य में एक केंद्रीय विश्वविधालय की स्थापना की गई किसी-किसी राज्य में दो भी | इस
केंद्रीय विश्वविधालय की खाशियत यह है कि
ये छोटे शहर में स्थापित किये गये है खासकर जो शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा
इलाका माना जाता है | जिसके पीछे की शायद मंशा ये रही होगी की ग्रामीण परिवेश के
विद्यार्थी जो बड़े शहर में जाकर शिक्षा नही ले सकते उनको कम खर्च में
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा सके और छोटे शहर की प्रतिभा को राष्ट्रीय और
अंतराष्ट्रीय पहचान मिल सके |
जून
के दूसरे हफ्ते में आठ केंद्रीय विश्वविधालय की संयुक्त परीक्षा सम्पन्न हुई
जिसमे मेरी बहन बहुत उत्साह के साथ परीक्षा
देने गई लेकिन जब परीक्षा देकर निकली तो
मैंने पूछा की पेपर कैसा गया तो उसका जवाब था की मैं कुछ लिख नही पाई, जिसकी वजह से
बहुत परेशान भी थी कारण पूछा तो बताया की प्रश्नपत्र सिर्फ अंग्रेजी भाषा में था, जिसके वजह से हमे प्रश्न समझ में ही नही आया इतना कहकर वह
रोने लगी, चूँकि मेरी बहन हिंदी माध्यम से पढ़ी है तो ये समस्या तो होनी लाजमी है |
उसकी परेशानी को देखकर जब इस घटना को विश्वविधालय प्रसाशन के पास रखा तो उनका एक टुक
जवाब था की केंद्रीय विश्वविधालय का नियम ही है की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम में होगी,
इसलिए अंग्रेजी माध्यम में प्रवेश परीक्षा लिया जा रहा है ,जब मैंने पूछा की पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी हो सकता है लेकिन लिखित प्रवेश परीक्षा अंग्रेजी
में लेने का क्या औचित है इस पर प्रशासन ने नियम का हवाला देकर बातों को टालने की
कोशिश की , बगल में खड़े एक सज्जन मेरी बातों को सुनकर बोले की अगर भारत को विकसित
देश में शामिल होना है तो अंग्रेजी में पढ़ाई करना जरूरी है क्योकि इससे हम विश्व
स्तर पर जुड़ सकते है , मेरा जवाब था की इस आधार पर तो चीन को विकसित ही नही होना
चाहिए था ,क्योंकि चीन अपनी ही भाषा में शिक्षा देते आ रहा है और विश्व स्तर पर
अपना अलग पहचान रखता है | अगर देखा जाये तो किसी भी राज्य में उनकी मातृभाषा में
ही प्राथमिक शिक्षा देने का प्रावधान है , जैसे पंजाब में पंजाबी भाषा में हिंदी
राज्यों में हिंदी माध्यम से तो प्रश्न उठता है की इतने केंद्रीय विश्वविधालय किसके लिए खोले गए है किसी
भी राज्य की प्राथमिक शिक्षा का माध्यम सिर्फ अंग्रेजी नही है | अगर राज्य स्तर पर के विश्वविधालय में अग्रेजी है भी तो उस राज्य के भाषा में भी
शिक्षा लेने का प्रावधान है तो फिर उसी राज्य में खोले गये केंद्रीय विश्वविधालय का खोलने क्या औचित है ?
इस तरह के मेरे लाख तर्क के बाद भी इस समस्या का कोई हल
निकलता नज़र नही आता | अब मेरे जेहन में कई सवाल एक साथ कौंध रहे है की देश के विकास के नाम पर गरीब बच्चे, जिसके पास
अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढने के लिए पैसा नही है और उस ग्रामीण इलाके में
जहां पर अंग्रेजी माध्यम के स्कूल नही है , के मूल अधिकार को कुचलने के औजार के रूप में
अंग्रेजी को इस्तेमाल किया गया है | मेरी बहन की इसमें क्या गलती है जिसको उसकी
सजा मिली, सोचता हूँ कि इतने पास रहते हुए भी ये केंद्रीय विश्वविधालय मेरी बहन
जैसे अपनी मातृभाषा में शिक्षा लेनेवालों के लिए कितना दूर नज़र आता है शायद लंदन
जितना दूर................../
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