दुनिया
इस दुनिया में कोई भरोसे के काबिल नहीं रहा
अपना दुश्मन भी अब अपना कातिल नहीं रह
उन्हें तो हर बात पे है रूठने कीआदत,तो रहे
हमें भी अब मनाने का वक़त नहीं रहा
इसे कहते है रोने का सलीका
बहुत रोया मगर आँख में आंसू नहीं रहा
हर जगह झूठ और लूट बिकता है बाज़ार में
सच को तौल सके ऐसा कोई तराजू नही रहा
महफूज नहीं देश की आधी आबादी
क्या इस जहा में अब कोई आदमी नहीं रहा
कितना सन्नाटा है इस महफिल में ' जादू '
सच बोलने का अब किसी में हिम्मत नहीं रहा
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