अमृता  प्रीतम  की एक कविता


तू नहीं आया
चैट ने करवट ली
रंगों के मेले के लिए
फूलो ने  रेशम बटोरा -------
तू  नहीं आया

दोपहर लम्बी हो गयी ,
दखो को लाली छू गयी
दराती ने गेहू की बलिया चूम ली -------
तू नहीं आया

बादलों  की दुनिया छ गयी ,
धरती ने दोनों हाथ बढाकर
आसमान  की रहमत पी ली
तू नहीं आया

पेड़ो ने जादू का दिया ,
जंगल के आयी हवा के
होंटों से  शहद भर गया -----
तू नै आया 

ऋतू ने एक टोना कर दिया ,
चाँद ने आकर
रत के माथे झूमर लटका दिया
तू नहीं आया

आज तारों ने फिर कहा,
उम्र के महल में अब भी 
उसन के दिए जल रहे है -----
तू नहीं आया 

किरणों  का झुरमुट कहता है ,
रातों की गहरी नींद से 
रोशनी अब भी जगती है -------
 तू  नही आया