यह लेख लिखे जाने तक जनता ने जिस व्यक्ति को जूता चलाया था, वह कोई नेता नही बल्कि अभिनेता है । एक सुलझे हुए , अपने जबाने का नामी गरामी अभिनेताओं में गिनती होती थी ं, अभिनेता जितेन्द्र मुबई में एक चुनाव पाटी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे, तभी उन पर किसी ने चपल मारा ,उस व्यक्ति का पता नही चला कि वह क्या ? चाहता था ,उसकी नाराजगी के वजह क्या थे ।
लेकिन इसकी ‘सुरूआत में जातें है तो जूता से मारने की जो बयार आज चल पडी है उसके पीछे इराकी मूल के पत्रकार मुंतजर अल जैदी जिसने जार्जा डब्लू -बूश पर दो जूता चलाकर मारा था । इस घटना पर शायद ही किसी भले मानस का साहस एवं सौर्य की प्रसंशा करते नही थकतें थें। जाहिर सी बात है ,कि बुश साहब ने जो इराक में किया है , उसे कौन ? संवेदनशील व्यकित का गुस्सा नही आया होगा । इराक को तबाह - varbad करने में बुश साहब ने कोई कोर कसर नही छोडी है , वहॉ की जनता में त्राहि -त्राहि मचा हुआ है , जैदी ने बुश के प्रति इराकीयों के नफरत को जग जाहिर कर दी ।
इसके साथ ही उनलोंगो केा भरी एक नया हथियार थमा दी । जो किसी के प्रति गुस्सा कुट -कुट के भरा है लेकिन उस गुस्से के प्रदर्शित करने का मौका नही मिलता । क्योकि सामने वाला व्यक्ति का कद इतना बडा है । आगे -पीछे सुरक्षा कवच लगे होने से साहस जवाब देने लगती है । व्यक्ति अपने अंदर के प्रतिरोध को दबाये रखता है ।
जूता से मारने का प्रचलन अन्य देशों के तरह भारत मे भी आया । इसकी ‘ाुरूआत जगदीश टाइटलर ने 1984 के सीख दंगों में अहम भूमिका थी । जिसमें सी0 बी0 आई 0 ने उनकी पुरानी दाग को एक ही झटके में डिटर्जेट की तरह साफ -सुथरा कर दिया । उसके बाद कॉग्रेस ने उनको चुनाव लडने के लिए टिकट भी दे डाली इससे नाराज प्रत्रकार जरनैल सिंह ने वितमंत्री पी चिदम्बरम पर आम सभा में जूते से मारकर अपनी भडास निकाली । उस समय तो वितमंत्री जी ने कुछ प्रतिक्रिया व्यक्त नही की लेकिन समय के नजाकत को समझते हुए , तुरंत जगदीश टाइटलर को पाटी से चुनाव लडने पर रोक लगा दी
इसके बाद चुनावी भाशणों में जूतों से मारने की घटना आम होते चले गये । उसके बाद जिंदल पर जूते फेके गये । यहा तक की लालकृश्ण आडवाणी पर भी चपल से मारनेवाला व्यक्ति उसे नकली लौहपुरूश कहॉ । नेता स्थितियों को भापते हुए हमारें नेता अब भाशण के वक्त लोहे कि जाली लगाने लगे है । ताकि जनता के नाराजगी से बचा जा सके । अब जूता प्रतिरोध का नया, सस्ता सुरक्षित सुलभ , हथियार बन गया है । नेताओ को एक बात गाठ बाध लेनी चाहिए कि मनमानी करके सही- सलामत नही बच सकते है । मौका मिलते जनता अपना हिसाब चुकता कर देगी ।