उटठो अब माटी से उटठो
जागो मेरे लाल
अब जागो मेरे लाल
तुम्हारी सेज सजावन करन
देखो आई रैन अंधियारन

नीले ‘ शाल दोशाले लेकर
जिनमें इन दुखियन अंखियन ने
ढेर किये हैं इतने मोती
इतने मोती जिन की ज्योति
दान से तुम्हारा
जगमग लागा
नाम चमकने

उटठो अब माटी से उटठो
जागो मेरे लाल

अब जागो मेरे लाल
घर घर बिखरा भोर का कुन्दन
घोर अंधेरा अपना ऑगन
जाने कब से राह तके हैं
बाली दुल्हनिया , बॉके वीरान है
सूना तुम्हारा राज पडा है

बैरी बिराजे राज सिहासन
तुम माटी में लाल
उटठो अब माटी से उटठो, जागो मेरे
लाल हठ न करो माटी से उटठो ,जागो मेरे लाल
अब जागो मेरे लाल
फैज अहमद फैज