
आज और कल के बीच में
जानों
एक जुदाई का दरिया है
इस दरिया में
मेरे-तुम्हारे आज का सूरज डूबा
आओ हम -तुम हिज्र के इस बहते दरिया के काले पानी में अपने सपनों की कुछ नौकायें
डालें
सपनों की उन नौकाओं पर
हिज्र कें इस काले दरिया को पार करें
और सूरज के उजाले साहिल पर उतरें
राही मासूम रज़ा
Post a Comment